रोहतास मठ , बाबू देवकीनंदन खत्री जी के सुपुत्र बाबू दुर्गाप्रसाद जी की रचना है। यह लहरी बुक डिपो वाराणसी से प्रकाशित है ।
यह पुस्तक दो खंड और 6 भागो में विभक्त है। इस पुस्तक को हम चंद्रकांता संतति और भूतनाथ के आगे की पुस्तक कह सकते है। इसमें राजा गोपाल सिंह और मायारानी की कथा है एवं जो जो बातें चंद्रकांता संतति और भूतनाथ में आने से रह गयी है या छूट गयी है , वह भी स्पष्ट होती है।
अंत में मेरा आपसे यही अनुरोध है की अगर आप को यह रचना पसंद आती है तो आप इससे ख़रीदे ताकि लेखक अथवा प्रकाशक को आर्थिक रूप से संबल मिले ।
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